Saturday, August 4, 2018

Know Everything About G's (1G,2G,3G,4G,5G) | G Stands For Generation | History of Network

Know Everything About G's (1G,2G,3G,4G,5G)

Hello frends क्या आप को पता है 5G,4G,3G,2G,1G, नेटवर्क होता क्या है कैसे काम करता हैहाल के दिनों में 4G नेटवर्क पुरे इंडिया में आई है जिसमे एक तरफ जहां रिलायंस जियो देश भर में बड़े पैमाने पर साल के फ्री सेवा प्रदान किया है वही साथ ही साथ में एयरटेल , वोडाफ़ोन और भी टेलिकॉम कम्पनी 4G सेवा प्रदान  कर रही है इंडिया में और बहुत ही जल्द 5G नेटवर्क इंडिया में आने वाली है

In the recent times, 4G networks have come across India, on one side where Reliance Jio has provided free year-round service on a large scale, as well as Airtel, Vodafone and also Telecom Company providing 4G services in India. And very soon 5G network is coming to India
चलिए फ्रेंड जानते है की 5G,4G,3G,2G,1G, नेटवर्क होता क्या है कैसे काम करता है


5G, 4G, 3G, 2G, 1G, network

Let's know that 5G, 4G, 3G, 2G, 1G, network is what works


1G network   1G technology is considered to be the first technology of wireless telephony in the world. This technique was first introduced in 1980 and it was used till 1992-93. The speed of data in this was 2.4 kVps. The major drawback of this technique was not to be roaming in it.For the first time in the US 1G mobile system used this technique. In this the voice quality on mobile phones was quite bad, and it consumed too much of the battery. Mobile handsets running this technique used to be extremely heavy. It was a technique based on analog signals.

2G Network   2G technology was started in Finland in 1991. This is a technology based on Global System for Mobile Communication, which is briefly called GSM technology. Digital signals were used for the first time in this technique. Through this technology, in addition to phone calls, message messages, text messages and multimedia messages were being sent. The biggest advantage of this technique is that using it consumes much less energy and the battery of the phone is much more efficient.The speed of data on this technique can be up to 50,000 bits per second. This technique mainly transmits the signal of voice. The maximum speed of download and upload of 2G technology is 236 kVps (kg byte per second). Its advance version was named 2.5G and 2.7G, in which the pace of exchange of data increased even further.
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3G network 3G technology started in Japan in 2001. This technology was standardized by the International Telecommunication Union (ITU). Through this technique, mobile televisions and video conferencing or video calls can be made in addition to text, photo and video. This technology revolutionized the world and promoted the next generation of mobile phones i.e. smartphone.The speed of data in 3G technology is up to 4 million bits per second. The emphasis of 3G technology is mainly on data transfer. One of the key features of 3G is that it is more secure (encrypted) for data exchange than 2G technology. The maximum speed of 3G technology is 21 MVPS and upload speed is 5.7 MVPS. This technology opened the
way for making an app for mobile phones.


4G Network 4G technology started in the year 2000. This is called fourth generation of mobile technology. Through this technology, data can be downloaded from 100 MVPS to 1 Gbps speed-download. It supports global roaming. This technique is cheaper than 3G. There is also more security features in it. However there are some flaws in this technique.As it consumes more battery than 3G. At the same time, 3G technology consumes a lot of battery compared to 2G. Mobile phones equipped with 4G technology require complex hardware, so phones from 4G phones are expensive compared to 3G phones. The cost of 4G technology is to build expensive equipmentHowever, as this technique becomes common, prices of both phones and network equipment will be reduced. At present, 4G technology is available in many countries of the world, mainly comprising developed countries. The biggest drawback of 3G technology is where the minimum speed of data is about 2.5 G. At the same time, the biggest advantage of the 4G technology is that it can get at least 54 MVs of speed in poorly networked networks.


5G, Network 5G technology started in the year 2010. This is called the fifth generation of mobile networks. This is designed keeping in mind the 'Wireless Burns Wide Web' (Mobile Internet). The data can be extensively used in this technique. In this, a multimedia newspaper can be broadcasted with HD quality video. Also, this technology will revolutionize the field of video calling. The sound of ultra high-definition quality can be broadcast in this technique.In this technique, the speed of data can be more than 1 GVPS, although its maximum speed has not been defined so far as it is currently in concept mode and the work is underway. The biggest feature of this technique will be large-scale data exchange in real time. At the same time, this technology will open a new path in the field of enhanced reality (i.e., through which you will be able to talk face-to-face on the phone call).In the various science fiction and fantasy tales, the way people appear in front of you in a virtual form and you are able to talk to him face-to-face. This technique would be possible to do this. According to estimates, the 5G technology will be used in Dhalalay till 2020. At present, the UK's capital London is preparing to set up 5G technology by 2020.
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  • 1G नेटवर्क

           1G तकनीक दुनिया में वायरलेस टेलीफोनी की पहली तकनीक मानी जाती है। यह तकनीक पहली बार 1980 में सामने आई और 1992-93 तक इसका इस्तेमाल किया जाता रहा। इसमें डेटा की आवाजाही की रफ्तार 2.4 केवीपीएस थी। इस तकनीक की बड़ी खामी इसमें रोमिंग का ना होना था। पहली बार अमेरिका में 1जी मोबाइल सिस्टम ने इस तकनीक का प्रयोग किया था। इसमें मोबाइल फोन पर आवाज की क्वालिटी काफी खराब थी, साथ ही यह बैटरी की भी बहुत अधिक खपत करता था। इस तकनीक पर चलने वाले मोबाइल हैंडसेट बेहद भारी हुआ करते थे। यह एनालॉग सिग्नल पर आधारित तकनीक था।


  • 2G नेटवर्क   

        2G तकनीक की शुरुआत 1991 में फिनलैंड में हुई। यह ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्यूनिकेशन पर आधारित तकनीक है जिसे संक्षिप्त रूप में जीएसएम टेक्नॉलजी कहा जाता है। इस तकनीक में पहली बार डिजीटल सिग्नल का प्रयोग किया गया। इस तकनीक से माध्यम से फोन कॉल के अलावा पिक्चर मैसेज, टेक्स मैसेज और मल्टीमीडिया मैसेज भेजा जाने लगा। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे इस्तेमाल करने से काफी कम ऊर्जा की खपत होती है और फोन की बैटरी काफी ज्यादा चलती है। इस तकनीक पर डेटा के आनेजाने की रफ्तार 50,000 बिट्स प्रति सेकेंड तक हो सकती है। यह तकनीक मुख्य रूप से आवाज के सिग्नल को प्रसारित करता है। 2जी तकनीक से डाउनलोड और अपलोड की अधिकतम स्पीड 236 केवीपीएस (किलो बाइट प्रति सेकंड) होती है। इसके एडवांस वर्शन को 2.5जी और 2.7जी नाम दिया गया था, जिसमें डेटा के आदान-प्रदान की रफ्तार और भी बढ़ गई थी।

  • 3G नेटवर्क  

           3जी तकनीक की शुरुआत 2001 में जापान में हुई। इस तकनीक का मानकीकरण इंटरनेशनल टेलेकम्यूनिकेशन यूनियन (आईटीयू) ने किया था। इस तकनीक के माध्यम से टेक्स्ट, तस्वीर और वीडियो के अलावा मोबाइल टेलीविजन और वीडियो कांफ्रेसिंग या वीडियो कॉल किया जा सकता है। इस तकनीक ने दुनिया में क्रांति ला दी और मोबाइल फोन की अगली पीढ़ी यानी स्मार्टफोन को बढ़ावा दिया। 3जी तकनीक में डेटा के आने-जाने की रफ्तार 40 लाख बिट्स प्रति सेकेंड तक होती है। 3जी तकनीक का जोर मुख्य रूप से डेटा ट्रांसफर पर है। 2जी तकनीक के मुकाबले 3जी की एक अहम खासियत यह है कि यह आंकड़ों के आदान-प्रदान के लिए अधिक सुरक्षित (इनक्रिप्टेड) है। 3जी तकनीक की अधिकतम डाउनलोड स्पीड 21 एमवीपीएस और अपलोड स्पीड 5.7 एमवीपीएस होती है। इस तकनीक ने मोबाइल फोन के लिए एप बनाने का रास्ता खोल दिया।

  • 4G नेटवर्क 

           4जी तकनीक की शुरुआत साल 2000 के अंत में हुई। इसे मोबाइल तकनीक की चौथी पीढी कहा जाता है। इस तकनीक के माध्यम से 100 एमवीपीएस से लेकर 1 जीबीपीएस तक की स्पीड से डेटा का डाउनलोड-अपलोड किया जा सकता है। यह ग्लोबल रोमिंग को सपोर्ट करता है। यह तकनीक 3जी के मुकाबले कहीं सस्ती तकनीक है। साथ ही इसमें सिक्युरिटी के फीचर्स भी ज्यादा है। हालांकि इस तकनीक की कुछ खामियां भी है। जैसे कि यह 3जी के मुकाबले कहीं अधिक बैटरी की खपत करता है। वहीं, 3जी तकनीक में 2जी के मुकाबले काफी अधिक बैटरी की खपत होती है। 4जी तकनीक से लैस मोबाइल फोन में जटिल हार्डवेयर प्रणाली की जरूरत होती है, इसलिए 3जी फोन के मुकाबले 4जी के फोन महंगे होते हैं। 4जी तकनीक की आधारभूत संरचनाओं को तैयार करने में महंगे उपकरण लगाने होते हैं। हालांकि जैसे-जैसे यह तकनीक आम होती जाएगी, फोन और नेटवर्क इक्विपमेंट्स दोनों की कीमतों में कमी आएगी। फिलहाल 4जी तकनीक दुनिया के काफी कम देशों में उपलब्ध है जिनमें मुख्यतः विकसित देश शामिल हैं। 3जी तकनीक की सबसे बड़ी खामी जहां इसमें डेटा का न्यूनतम स्पीड लगभग 2.5जी के बराबर होना है। वहीं 4जी तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें खराब से खराब नेटवर्क में भी कम से कम 54एमवीपीएस की रफ्तार मिल सकती है।

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  •     5G,नेटवर्क   

            5जी तकनीक की शुरुआत साल 2010 में हुई। इसे मोबाइल नेटवर्क का पांचवी पीढ़ी कहा जाता है। यह 'वायरलेस बर्ल्ड वाइड वेब' (मोबाइल इंटरनेट) को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस तकनीक में बड़े पैमाने पर डेटा का आदान-प्रदान किया जा सकता है। इसमें एचडी क्वालिटी का वीडियो के साथ मल्टीमीडिया न्यूजपेपर प्रसारित की जा सकती है। साथ ही इस तकनीक से वीडियो कॉलिंग के क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी। इस तकनीक में अल्ट्रा हाइ डेफिनिशन क्वालिटी की आवाज का प्रसारण किया जा सकता है। इस तकनीक में 1 जीवीपीएस से अधिक स्पीड से डेटा की आवाजाही हो सकती है, हालांकि अभी तक इसकी अधिकतम स्पीड डिफाइन नहीं की गई है, क्योंकि अभी यह कांसेप्ट के दौर में है और इस पर काम चल रहा है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी रियल टाइम में बड़े से बड़े डेटा का आदान-प्रदान होगा। साथ ही यह तकनीक संवर्धित वास्तविकता (अगर्मेंटेड रियलिटी) के क्षेत्र में नया रास्ता खोलेगी, यानि इसके माध्यम से फोन कॉल पर आप बिल्कुल आमने-सामने बात कर पाने में सक्षम होंगे। विभिन्न साइंस फिक्शन और फंतासी कथाओं में जिस प्रकार व्यक्ति आपके आगे आभासी रूप में उपस्थित हो जाता है और आप उससे आमने-सामने बात करने में सक्षम होते हैं। इस तकनीक से ऐसा करना संभव हो सकेगा। अनुमान के मुताबिक 5जी तकनीक साल 2020 तक धड़ल्ले से प्रयोग में आने लगेगी। फिलहाल ब्रिटेन की राजधानी लंदन में साल 2020 तक 5जी तकनीक लगाने की तैयारी चल रही है।

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